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One day lecture cum interactive session on 'Gender Issues'

KSS Jain college of Education has organised a one-day Lecture cum Interactive Session on 'Gender Issues' on May 13th May 2022. The lecture session focussed on various dimension of gender issues and how to bring about gender equality in true sense. The faculty members and the students were privileged enough to have among them Prof. Sridipa Sinha, HOD, Department of Education, University of Calcutta as the resource person. Welcome speech was given by principal Dr. Sadhana Jha. In her lecture Prof. Sridipa Sinha clearly explained the concept of gender and various dimensions of gender issues. Her lecture clearly showed that gender issues are a global in nature though it varies from country to country. She also put forward the probable solutions to overcome gender inequality. Her lecture has illuminated the students and the faculty members alike. At the end of the session vote of thanks was given by Prof.Trisha Banerjee. Prof. Sudeshna Mukherjee was the convener of the event.
 

"के.एस एस.जैन कॉलेज ऑफ एजुकेशन" में *लैंगिक समस्या**विषय पर एक दिवसीय व्याख्यान I

के.एस.एस. जैन कॉलेज ऑफ एजुकेशन में लैंगिक समस्या पर एक दिवसीय व्याख्यान का आयोजन किया गया I कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रोफेसर सुदेशना गुप्ता मुख्य अतिथि, प्रोफेसर श्री दिपा सिनहा का परिचय दी I कॉलेज की प्राचार्या डॉक्टर साधना झा ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि वास्तविकता यह है कि कन्या के जन्म को आज भी चिंता का जन्म माना जाता है I प्रमुख वक्ता के रूप में कोलकाता विश्वविद्यालय के एजुकेशन विभाग की विभागगाध्यक्ष ने कहा कि स्त्री पुरुष से ही समाज चलता है I अब लिंग भेद के प्रति लोगों की सोच बदल रही है I उन्होंने यह भी कहा कि समाज में नारी की स्वतंत्रता की बात की जाती है किंतु उसके अधिकार और कर्तव्य के बारे में बात नहीं होती है I प्रोफेसर सिन्हा ने ट्रांसजेंडरो, गे,बाई-सेक्सुअल की भी चर्चा की I उन्होंने कहा कि आजादी के 75 वर्षों बाद भी लैंगिक समस्या बनी हुई है I जन्म से लेकर शिक्षा, चिकित्साआदि में लैंगिक भेदभाव किया जाता है I लैंगिक समस्या को बढ़ावा देने में सामाजिक,धार्मिक, राजनीतिक और आर्थिक कारण प्रमुख है I उन्होंने यह भी कहा कि उच्च शिक्षा,सामाजिक सुरक्षा,जन जागरण द्वारा लैंगिक समस्या समाप्त हो सकती है I अंत में उन्होंने कहा कि-"हम बराबर हैं" I धन्यवाद ज्ञापन प्रो. तृषा बनर्जी ने दिया I कार्यक्रम को सफल बनाने में बी.एड और डी.एल.ई.डी के छात्र-छात्राओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई I

 

লিঙ্গ বৈষম্য ও ভারতীয় সমাজ - এক অসাধারণ আলোচনাসভার আয়োজনে কমলাদেবী সোহনরাজ সিংডী জৈন কলেজ অফ এডুকেশন

নিজস্ব প্রতিবেদন, কলকাতা, কাজী নজরুল ইসলাম, তার "নারী" কবিতার মধ্যে দিয়ে বিশ্বের সকল মহান সৃষ্টির পিছনে নারী-পুরুষ উভয়ের সম অংশগ্রহণের মধ্যে দিয়ে লিঙ্গ বৈষম্য দূরীকরণের উপর আলোকপাত করতে চেয়েছিলেন ঠিকই, কিন্তু যুগ যুগ ধরে এই বৈষম্যমূলক তাবনা যেন সমাজের রন্ধ্রে রন্ধ্রে মিশে গেছে। ভাই আজ আমরা এক তথাকথিত শিক্ষিত আধুনিক সমাজে বসবাস করলেও প্রতি নিয়ত কোনো না কোনো ভাবে এই লিঙ্গ বৈষম্যমূলক একাধিক সমস্যার সম্মুখীন আমাদের হতে হয়। মূলত আধুনিক শিক্ষিত, সমাজের আধুনিকতার, উদারতার আড়ালে থাকা এই জড় মানসিকতার উপর আলোকপাত করতে গত ১৩/৫/২০২২, শুক্রবার, কাশিপুর কমলাদেবী সোহনরাজ সিংতী জৈন কলেজ অফ এডুকেশন কর্তৃক এক আলোচনা সভার আয়োজন করা হয়। কলেজ প্রধান ডঃ সাধনা ঝাঁ মহাশয়ার উদ্যোগে ও মাননীয়া কলেজ কর্তৃপক্ষবৃন্দ, কলেজের অন্যান্য মাননীয় শিক্ষক শিক্ষিকাদের ঐকান্তিক সহযোগীতায় আয়োজিত এই আলোচনা সভার মুখ্য বক্তা ছিলেন কলকাতা বিশ্ববিদ্যালয়ের এডুকেশন বিভাগ প্রধান মাননীয়া প্রফেসর শ্রীদিপা সিন্হ মহাশয়া। আলোচনার মুখ্য বিষয় ছিল ভারতীয় সমাজের পরিপ্রেক্ষিত লিঙ্গ বৈষম্য। লিঙ্গ বিষয়ক ধারণা ও সমাজের কোন কোন দিকে কিভাবে আজও লিঙ্গ বৈষম্য লক্ষ্যনীয় ইত্যাদি বিভিন্ন বিষয়ে আলোকপাত সহ শিক্ষার্থীদের সক্রিয় অংশগ্রহণের মাধ্যমে এক অনবদ্য তথ্যসমৃদ্ধ আলোচনার সাক্ষী রইলো সবাই।